ज्ञान का इकोसिस्टम बनाती पत्रकारिताउदंत मार्तण्ड से डिजिटल युग तक बढ़ती हिंदी पत्रकारिताज्ञान-भारतम से बदलेगा इतिहास का लैंडस्केपअब यहां से कहां जाएं हमस्तरीय शोध-प्रकाशन को कैसे लगे पंखहिंदी पत्रकारिताः सबक 200 साल केभारतीय भाषाओं के वैश्विक पहचान की पहलमहात्मा फुले शताब्दी की समिति में साहित्यकार नीरजा माधव मनोनीतपत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं का हस्तांतरण नहीं न्याय की पक्षधरता हैकला-संस्कृति से जुड़ी संस्थाओं का हो पुनर्गठनरचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर बेईमानीफिल्मों से निकलते संदेश और हमारा समाजमीडिया में दिख रहा है किस औरत का चेहरा!भारतीय उच्चादर्शों को स्थापित करने वाले नायक हैं रामजनसंचार शिक्षा को सरोकारों से जोड़ने की जरूरतसाहित्य अकादेमी पुरस्कारों से उठते गंभीर प्रश्नचुनावी कवरेज की भी है लक्ष्मण रेखा!हिंदी के विरुद्ध ‘पवित्र जिहाद’पठनीयता के संकट के बीच खुद को बदल रहे हैं अखबारसमय के साथ बदला है हमारा मीडिया

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ज्ञान का इकोसिस्टम बनाती पत्रकारिता

हिंदी पत्रकारिता के दौ सौ वर्ष पूर्ण होने पर देश के अलग-अलग हिस्से में गोष्ठियों का आयोजन हो रहा है। हिंदी के पहले समाचारपत्र उद्दंत मार्तंड और उसके संपादक जुगुल

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उदंत मार्तण्ड से डिजिटल युग तक बढ़ती हिंदी पत्रकारिता

30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष आलेख हिंदी पत्रकारिता भारतीय समाज, संस्कृति और लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण धुरी रही है। यह केवल समाचारों के प्रसार का माध्यम नहीं,

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ज्ञान-भारतम से बदलेगा इतिहास का लैंडस्केप

पिछले दिनों भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के कई विद्वानों से संवाद का अवसर मिला। उनके विभिन्न प्रकार के शोध की जानकारी मिली। उच्च अध्ययन संस्थान में ही टैगोर फेलो

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अब यहां से कहां जाएं हम

हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई) की द्विशताब्दी के प्रसंग पर विशेष अब यहां से कहां जाएं हम? हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी (200 वर्ष)पर समारोहों की धूम है। दिल्ली, भोपाल, जयपुर,

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स्तरीय शोध-प्रकाशन को कैसे लगे पंख

कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में आयोजित अंतराष्ट्रीय पुस्तक मेला (फिलबो) में अलग अलग मंडप में देश-विदेश के प्रकाशकों ने अपने स्टाल लगाया था। फिलबो में एक मंडप में कोलंबिया के

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हिंदी पत्रकारिताः सबक 200 साल के

विकसित भारत का मंत्र है-“हिंदुस्तानियों के हित के हेत” हिंदी पत्रकारिता के 200 साल का जश्न मनाते हुए हमें यह विचार भी करना चाहिए कि आखिर हम कहां आ गए

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भारतीय भाषाओं के वैश्विक पहचान की पहल

लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में इस क्षेत्र के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में से एक का आयोजन होता है। इस वर्ष 21 अप्रैल से 4 मई तक

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महात्मा फुले शताब्दी की समिति में साहित्यकार नीरजा माधव मनोनीत

प्रधानमंत्री करेंगे उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च महिला नागरिक सम्मान नारी शक्ति पुरस्कार 2021 से सम्मानित एवं देश की जानी-मानी साहित्यकार डॉ नीरजा माधव प्रधानमंत्री

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पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं का हस्तांतरण नहीं न्याय की पक्षधरता है

मीडिया की ताकत आज सर्वव्यापी है और कई मायनों में सर्वग्रासी भी। ऐसे में विकास के सवालों और उसके लोकव्यापीकरण में मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो उठी है। यह

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कला-संस्कृति से जुड़ी संस्थाओं का हो पुनर्गठन

मार्च के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में साहित्य अकादेमी ने एक बड़ा साहित्य उत्सव का आयोजन किया। जानकारों के मुताबिक आयोजन पर करीब तीन करोड़ रुपए खर्च होते हैं। संगीत

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रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर बेईमानी

इन दिनों पूरे देश में फिल्म धुरंधर, द रीवेंज की सफलता की चर्चा हो रही है। इस फिल्म के निर्देशक आदित्य धर के निर्देशन के साथ-साथ इस फिल्म के कलाकारों

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फिल्मों से निकलते संदेश और हमारा समाज

इस वर्ष जनवरी के आखिर में जब रानी मुखर्जी अभिनीत फिल्म मर्दानी-3 रिलीज हुई थी तब दिल्ली से लापता हो रही बच्चियों का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। एक रिपोर्ट

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मीडिया में दिख रहा है किस औरत का चेहरा!

औरत की देह इस समय मीडिया का सबसे लोकप्रिय विमर्श है । सेक्स और मीडिया के समन्वय से जो अर्थशास्त्र बनता है, उसने सारे मूल्यों को शीर्षासन करवा दिया है

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भारतीय उच्चादर्शों को स्थापित करने वाले नायक हैं राम

राम का होना मर्यादाओं का होना है, रिश्तों का होना है, संवेदना का होना है, सामाजिक न्याय का होना है, करूणा का होना है। वे सही मायनों में भारतीयता के

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जनसंचार शिक्षा को सरोकारों से जोड़ने की जरूरत

शिक्षा का काम व्यक्ति को आत्मनिर्भर और मूल्यनिष्ठ मनुष्य बनाना है। जो अपनी विधा को साधकर आगे ले जा सके। मीडिया में भी ऐसे पेशेवरों का इंतजार है जो ‘फार्मूला पत्रकारिता’ से

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साहित्य अकादेमी पुरस्कारों से उठते गंभीर प्रश्न

आखिरकार साहित्य अकादेमी ने अपने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा कर ही दी। जैसी की साहित्य जगत में चर्चा थी उसी अनुसार अरुण कमल, अरविंदाक्षण और अनामिका की जूरी ने हिंदी

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चुनावी कवरेज की भी है लक्ष्मण रेखा!

‘पोलिटिकल लाइन’ कहीं ‘पार्टी लाइन’ में न बदल जाए अब जबकि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है तो हमारे मीडिया जगत में भी इन दिनों ईरान-अमरीका

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हिंदी के विरुद्ध ‘पवित्र जिहाद’

कुछ दिनों पूर्व नागिरीप्रचारिणी सभा, बनारस की फेसबुक वाल पर एक रील देखी जिसमें कवि अशोक वाजपेयी के वक्तव्य का एक अंश था। उस रील में अशोक वाजपेयी ने आचार्य

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पठनीयता के संकट के बीच खुद को बदल रहे हैं अखबार

भारत में अखबारों के विकास की कहानी 1780 से प्रारंभ होती है, जब जेम्स आगस्टस हिक्की ने पहला अखबार ‘बंगाल गजट’ निकाला। कोलकाता से निकला यह अखबार हिक्की की जिद,

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समय के साथ बदला है हमारा मीडिया

समय के साथ बदला है हमारा मीडिया, सामाजिक सरोकारों को छोड़कर पत्रकारिता संभव नहीं वक्त का काम है बदलना,वह बदलेगा। समय आगे ही जाएगा,यही उसकी नैसर्गिक वृत्ति है। ऐसे में

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भारत को जानो, भारत को मानो!

आरएसएस विचारक मनमोहन वैद्य की किताब कराती है भारतबोध -प्रो.संजय द्विवेदी हमारे राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श में ‘विचारों की घर वापसी’ का समय साफ दिखने लगा है। अचानक हमारी

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विज्ञापनों में भारतीयता के प्रणेता थे पीयूष पाण्डे

भारतीय विज्ञापन जगत में जब भी मौलिकता, रचनात्मकता और भारतीय संवेदना की बात होगी तो सबसे पहले जिस शख्स का नाम सामने आयेगा वे हैं पीयूष पाण्डे। वे केवल विज्ञापन

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गाँधी के राम

“हे राम…….” ये गाँधी के मुँह से निकले अंतिम शब्द हैं। इस प्रसंग की अक्सर चर्चा होती है कि गाँधी ने ऐसा कहा था कि जब वे शरीर त्यागें तब

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हिन्दी पत्रकारिता की आगामी दिशा

हिन्दी पत्रकारिता की आगामी दिशा: तकनीक, संवेदना और उत्तरदायित्व की त्रयी डॉ लाल बहादुर ओझा हिन्दी पत्रकारिता ने अपने 200 वर्षों के इतिहास में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। ‘उदन्त मार्तण्ड’

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तय हों मीडिया कवरेज की हदें और सरहदें

अपने लेखन और प्रस्तुति से कहीं भी मीडिया को आतंकवाद के प्रति नरम रवैया नहीं अपनाना चाहिए ताकि जनता में आतंकी गतिविधियों के प्रति समर्थन का भाव न आने पाए।

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जाति, बाहुबल के बीच विकसित बिहार के सपने!

बिहार में मुद्दा ‘लालूराज’ और ‘सुशासन बाबू’ ही हैं बिहार चुनाव हमेशा की तरह फिर जाति, बाहुबल और विकास के त्रिकोण में उलझा दिखता है। सामाजिक न्याय की ताकतों की

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संपादक के विस्थापन का कठिन समय!

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल की यात्रा का उत्सव मनाते हुए हमें बहुत से सवाल परेशान कर रहे हैं जिनमें सबसे खास है ‘संपादक का विस्थापन’। बड़े होते मीडिया संस्थान

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विचारधारा थोपना यानि घोड़े की पीठ पर मेढ़क लादना

पिछले महीने स्वाधीनता दिवस के आसपास झारखंड से कवि चेतन कश्यप ने अमृलाल नागर का एक आलोचक को लिखे पत्र, जो पुस्तकाकार भी प्रकाशित है, का स्क्रीन शाट भेजा। पुस्तक

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पत्रकारिता के नए अध्याय गढ़ने का समय

आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दखल और नित नई रंगत के साथ बदलती रोबोटिक्स की दुनिया ने यह तो तय कर ही दिया है कि पत्रकारिता के कुछ नए अध्याय गढ़ने

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हमारे प्रमुख लेखक
अनंत विजय

लगभग ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय अनंत विजय इस समय हिंदी में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले समाचार पत्र दैनिक जागरण में कार्यरत हैं। उनको सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार स्वर्ण कमल से पुरस्कृत किया जा चुका है। उनको पत्रकारिता का सर्वोच्च सम्मान गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार और बिहार सरकार का फादर कामिल बुल्के सम्मान मिला है। उन्होंने अब तक 15 पुस्तकों का लेखन किया है।

डॉ. धनंजय चोपड़ा

पाठ्यक्रम समन्वयक, सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज़, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की भूमिका निभा रहे हैं । मीडिया, संवाद, पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं। कई पुस्तकों के लेखक।

प्रो.संजय द्विवेदी

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग में आचार्य और अध्यक्ष हैं। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली के महानिदेशक रह चुके हैं। 32 पुस्तकों का लेखन और संपादन किया है।

डॉ.लालबहादुर ओझा

बीएचयू, वाराणसी में पढ़ाई के बाद जनसत्ता, कोलकाता और प्रभात खबर, राँची के साथ सक्रिय पत्रकारिता। आईआईएमसी, दिल्ली से अकादेमिक भूूमिका की शुरुआत। वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभाग में वरिष्ठ सहायक अध्यापक।

प्रो. पवित्र श्रीवास्तव

डॉ.पवित्र श्रीवास्तव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंपर्क और विज्ञापन विभाग के अध्यक्ष हैं। देश के वरिष्ठ मीडिया अध्यापकों में शामिल हैं। फ़िल्म में विशेष रुचि। अनेक विश्वविद्यालयों के मीडिया विभागों में अध्ययन मंडल के सदस्य हैं।

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