कला-संस्कृति से जुड़ी संस्थाओं का हो पुनर्गठनरचनात्मक स्वतंत्रकता के नाम पर बेईमानीफिल्मों से निकलते संदेश और हमारा समाजमीडिया में दिख रहा है किस औरत का चेहरा!भारतीय उच्चादर्शों को स्थापित करने वाले नायक हैं रामजनसंचार शिक्षा को सरोकारों से जोड़ने की जरूरतसाहित्य अकादेमी पुरस्कारों से उठते गंभीर प्रश्नचुनावी कवरेज की भी है लक्ष्मण रेखा!हिंदी के विरुद्ध ‘पवित्र जिहाद’पठनीयता के संकट के बीच खुद को बदल रहे हैं अखबारसमय के साथ बदला है हमारा मीडियाभारत को जानो, भारत को मानो!विज्ञापनों में भारतीयता के प्रणेता थे पीयूष पाण्डेगाँधी के रामहिन्दी पत्रकारिता की आगामी दिशातय हों मीडिया कवरेज की हदें और सरहदेंजाति, बाहुबल के बीच विकसित बिहार के सपने!संपादक के विस्थापन का कठिन समय!विचारधारा थोपना यानि घोड़े की पीठ पर मेढ़क लादनापत्रकारिता के नए अध्याय गढ़ने का समय

Press Release Swadesh Jyoti