पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं का हस्तांतरण नहीं न्याय की पक्षधरता हैकला-संस्कृति से जुड़ी संस्थाओं का हो पुनर्गठनरचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर बेईमानीफिल्मों से निकलते संदेश और हमारा समाजमीडिया में दिख रहा है किस औरत का चेहरा!भारतीय उच्चादर्शों को स्थापित करने वाले नायक हैं रामजनसंचार शिक्षा को सरोकारों से जोड़ने की जरूरतसाहित्य अकादेमी पुरस्कारों से उठते गंभीर प्रश्नचुनावी कवरेज की भी है लक्ष्मण रेखा!हिंदी के विरुद्ध ‘पवित्र जिहाद’पठनीयता के संकट के बीच खुद को बदल रहे हैं अखबारसमय के साथ बदला है हमारा मीडियाभारत को जानो, भारत को मानो!विज्ञापनों में भारतीयता के प्रणेता थे पीयूष पाण्डेगाँधी के रामहिन्दी पत्रकारिता की आगामी दिशातय हों मीडिया कवरेज की हदें और सरहदेंजाति, बाहुबल के बीच विकसित बिहार के सपने!संपादक के विस्थापन का कठिन समय!विचारधारा थोपना यानि घोड़े की पीठ पर मेढ़क लादना

डॉ.लालबहादुर ओझा

गाँधी के राम

“हे राम…….” ये गाँधी के मुँह से निकले अंतिम शब्द हैं। इस प्रसंग की अक्सर चर्चा होती है कि गाँधी ने ऐसा कहा था कि

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हमारे प्रमुख लेखक
अनंत विजय

लगभग ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय अनंत विजय इस समय हिंदी में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले समाचार पत्र दैनिक जागरण में कार्यरत हैं। उनको सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार स्वर्ण कमल से पुरस्कृत किया जा चुका है। उनको पत्रकारिता का सर्वोच्च सम्मान गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार और बिहार सरकार का फादर कामिल बुल्के सम्मान मिला है। उन्होंने अब तक 15 पुस्तकों का लेखन किया है।

डॉ. धनंजय चोपड़ा

पाठ्यक्रम समन्वयक, सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज़, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की भूमिका निभा रहे हैं । मीडिया, संवाद, पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं। कई पुस्तकों के लेखक।

प्रो.संजय द्विवेदी

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग में आचार्य और अध्यक्ष हैं। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली के महानिदेशक रह चुके हैं। 32 पुस्तकों का लेखन और संपादन किया है।

डॉ.लालबहादुर ओझा

बीएचयू, वाराणसी में पढ़ाई के बाद जनसत्ता, कोलकाता और प्रभात खबर, राँची के साथ सक्रिय पत्रकारिता। आईआईएमसी, दिल्ली से अकादेमिक भूूमिका की शुरुआत। वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभाग में वरिष्ठ सहायक अध्यापक।

प्रो. पवित्र श्रीवास्तव

डॉ.पवित्र श्रीवास्तव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंपर्क और विज्ञापन विभाग के अध्यक्ष हैं। देश के वरिष्ठ मीडिया अध्यापकों में शामिल हैं। फ़िल्म में विशेष रुचि। अनेक विश्वविद्यालयों के मीडिया विभागों में अध्ययन मंडल के सदस्य हैं।

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