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पत्रकार का लहजा नरम और सवाल सख्त होना चाहिए: अब्दुल वदूद साजिद

भोपाल, 16 सितंबर। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में बुधवार को एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दैनिक ‘इंक़लाब’ (उर्दू दैनिक) के संपादक श्री अब्दुल वदूद साजिद ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए अपने पत्रकारिता के चार दशक के अनुभव साझा किए। कर्नल गद्दाफी एवं सद्दाम हुसैन जैसे वैश्विक नेताओं से किए गए साक्षात्कार की चर्चा करते हुए उन्होंने छात्रों से कहा कि असली पत्रकार वही है जो बिना किसी पूर्वग्रह या बिना तैयारी के भी परिस्थितियों को संभालने का हुनर रखता है। पत्रकार हर घटना से लगातार सीखता रहता है।

उन्होंने छात्रों को हमेशा सकारात्मक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय का पहिया घूमता रहता है, अच्छा और बुरा दौर आता-जाता रहता है। मुख्यधारा की मीडिया में किसी स्थिति से लोग खुश या नाराज हो सकते हैं, लेकिन पत्रकार को किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब आप अकेले हों तो आईने के सामने खड़े होकर यह दोहराएं कि ‘मुझे सब कुछ आता है’ ताकि आत्मविश्वास बना रहे। लेकिन जब आप किसी दूसरे से बात कर रहे हों, तब आपका व्यवहार और भाव हमेशा सीखने वाला होना चाहिए।

इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के लहजे और गरिमा पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की एक पत्रकार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि आजकल प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार सवाल पूछते नहीं, बल्कि ‘दागते’ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सवाल पूछने और दागने में बहुत फर्क होता है। हमारे सवाल सख्त और तीखे हो सकते हैं, लेकिन हमारा लहज़ा हमेशा नरम और शालीन होना चाहिए, क्योंकि प्रेस कॉन्फ्रेंस का मतलब बहस या लड़ाई करना नहीं होता।

स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारत के आज़ादी के आंदोलन में उर्दू पत्रकारिता ने एक बागी पत्रकारिता की भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी, सहायक प्राध्यापक डॉ. लाल बहादुर ओझा, एडजंक्ट प्रोफेसर गिरीश उपाध्याय, डा. गरिमा पटेल, डा.शलभ श्रीवास्तव, डा.बबिता रानी घोष, डा.उदित्य सिंह सेंगर सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्यार्थी विनम्र तिवारी ने श्री साजिद का विभाग की ओर से पुस्तकें भेंट कर स्वागत किया।

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