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युवाशक्ति ही भरेगी भारत के सपनों में रंग

 

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष

भारत एक युवा देश है और उसके सपने बहुत बड़े हैं। सपना है विकसित भारत का, एक नए भारत का, समृद्ध भारत का। 2047 हमारे लिए लक्ष्य वर्ष है। तब तक हम अपने सब संकटों और बाधाओं से निजात पाकर विश्वगुरु भारत बनाना चाहते हैं। ऐसा भारत जो दुनिया को देने वाला देश होगा। अपने ज्ञान-विज्ञान, कौशल, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्कर्ष के मंत्र देने वाला भारत। एक सुंदर दुनिया बनाने का सपना देखने वाला भारत आज संभव होता हुआ दिखता है। हम उस यात्रा की ओर बढ़ चले हैं। 15 से 29 वर्ष की आयु वाले 37.1 करोड़ लोग निश्चित ही सपनों, उमंगों और उत्साह से भरे हैं। उन्हें पता है कि नया भारत उन्हें ही बनाना है। जहां भारत का ग्रोथ इंजन और उसकी रफ्तार ही उनके सपनों को सच कर सकेगी। शिक्षा, कौशल और रोजगार का संतुलन एक विकसित देश की व्यवस्था ही कर सकती है, हम उस ओर लगातार बढ़ रहे हैं, एक बड़ी आबादी के बाद भी।

युवा शक्ति के मायने ही हैं- ऊर्जा, उत्साह और बदलाव की क्षमता। जाहिर है किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की सोच, दृष्टिकोण और बदलाव की क्षमता पर निर्भर करता है। हम जानते हैं कि विकास के अनेक मानक हैं। प्रगति के अनेक सूत्र होते हैं। किंतु असली प्रगति वही है जो सिर्फ आर्थिक नहीं होती बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक और तकनीकी भी होती है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सहभागिता ही किसी लोकतंत्र को सार्थक बनाती है।

आज हमारे देश के युवा नवाचार और स्टार्टअप के माध्यम से जाब सीकर के स्थान पर जाब क्रिएटर बन रहे हैं। वे देश के सपनों में रंग भर रहे हैं। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग से वे इतिहास की रचना कर रहे हैं। भारत के युवा वैश्विक स्तर पर श्रेष्ठ मानव संसाधन के रुप में काम कर रहे हैं। दुनिया में भारतीय कार्यबल को श्रेष्ठतम माना जा रहा है। क्योंकि भारतीय स्वभाव से मेहनती, समावेशी और विविध संस्कृतियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करने वाले माने जाते हैं। यह उन्हें सहज ही प्राप्त है क्योंकि भारत में रहते हुए ही आप विविध भाषाभाषियों, क्षेत्रवासियों,स्थानीय संस्कृति के सहज प्रवाहों के साथ अभ्यस्त होते हैं। विविधता और बहुलता को स्वीकारने की शक्ति उन्हें भारत भूमि ने दी है। इसलिए दुनिया में कोई हमें पराया या शत्रु प्रतीत नहीं होता। हिंसा और आंतकवाद को हमने कभी जगह नहीं दी। इसलिए विश्वशांति और अहिंसा के नायक नानक,बुद्ध, महावीर से लेकर महात्मा गांधी तक हमें प्रेरित करते हैं। राजा राम का आदर्श हमारे सामने होता है और विविध कलाओं से युक्त कृष्ण हमें गीता के माध्यम से कर्मयोग की राह दिखाते हैं।

सामाजिक सुधार और नागरिक कर्तव्यों का पालन करना आज की बड़ी चुनौती है। यह जिम्मेदारी हमारे युवाओं की ही है कि वे ऐसा भारत बनाएं जहां भेद न हो। जाति, पंथ, भाषा, लैंगिक भेदभाव के आधार पर फैसले न हों। हमें ऐसा देश बनाना है जहां कुरीतियां न हों। पर्यावरण संरक्षण इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है। अपने परिवेश, गांव, नगर, नदियों,तालाबों, पेड़-पौधों, प्रकृत्ति का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के मद्देनजर लक्ष्यों का निर्धारण, ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छता और सतत जीवनशैली ही हमें सशक्त बना सकती है।

हमें यह भी विचार करना होगा कि क्या हम ऐसे युवाओं का निर्माण कर रहे हैं जो डिग्री के साथ कौशल से भी युक्त हैं। शिक्षा और व्यवहारिक ज्ञान में अंतर है। हमें इसे कम करते हुए अपने लोगों को कौशल युक्त करना है। भारत की नई शिक्षा नीति इस पर प्रकाश डालती है किंतु इसे जमीन पर उतारना शिक्षा संस्थानों की बड़ी जिम्मेदारी है। हमारे स्नातकों के बारे में आ रही रिपोर्ट्स चिंता में डालती है, वे बताती हैं कि उनके पास डिग्री तो है पर वे कार्य कुशल नहीं हैं। ऐसी डिग्री का फायदा क्या है। जाहिर है शिक्षा क्षेत्र में ऐसी स्थितियां हास्यापद और चिंतनीय हैं। डिजिटल समय में युवाओं के पास अवसर हैं तो भटकाव की भी स्थितियां हैं। करियर की स्पर्धा और बेरोजगारी की चुनौतियां भी मुंह बाए खड़ी हैं। स्किल गैप को कम करते हुए,संतुलित डिजिटल उपयोग करते हुए हमें अपनी योग्यता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। मानसिक तनाव और करियर के दबाव में आने के बजाए हिम्मत रखते हुए उस क्षेत्र का चयन करना जहां हमारा प्रदर्शन ठीक-ठाक हो सके। आज ऐसे अनेक काम हैं जिन्हें करने के लिए युवाओं का इंतजार है। नए विचार न हों तो परंपरागत कामों को भी करने वाले नहीं मिलते। बहुत सारी सेवाएं हैं जहां बहुत पढ़ाई के बजाए कौशल और अभ्यास से भी काम चल जाता है।

देश में पिछले दिनों हुए छात्र आंदोलन ने साबित किया कि उनमें कल्पनाशीलता भी है, अपेक्षित साहस भी। वे ताकतवर सरकारों को झुका सकते हैं। सत्ता का दंभ भी तोड़ सकते हैं। बावजूद इसके युवाओं में देशप्रेम और नैतिक मूल्यों का होना बहुत जरूरी है। सही मार्गदर्शन मेंटरशिप के बिना जीवन पतवार के बिना नौका जैसा हो जाता है। ऐसे में नदी में नाव हिचकोले खाती रहती है। निश्चित रूप से देश में अवसरों की कमी नहीं है। सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग करते हुए, राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हमें कदम उठाने की आवश्यक्ता है। स्वामी विवेकानंद ऐसे कठिन समय में हमारे पास आते हैं और कहते हैं- “उठो,जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।” विकसित भारत-2047 का सपना युवाओं को ही पूरा करना है, क्योंकि इसके फल उन्हें और उनकी भावी पीढ़ियों को भोगने हैं। आज की गई मेहनत कल हमें उत्तम परिणाम देगी, इसमें दो राय नहीं है। हमारी नई पीढ़ी के पास लोकतंत्र ने असहमति का अधिकार भी दिया है और संविधान ने समान अवसरों को भी सुनिश्चित किया है। लोकतंत्र की बेहतरी के लिए यह बहुत जरुरी है कि हम अपने विचारों को व्यक्त करें और दुनिया जहान में हो रहे परिवर्तनों से परिचित रहें। हमें पता है राष्ट्र का निर्माण ईंट-पत्थरों या सरकारी प्रयासों भर से नहीं होता है। बल्कि देश के नागरिकों के चरित्र,सोच और कर्मों से होता है। आज के नौजवान अगर अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा, सकारात्मक सोच, अनुशासन और देश हित में लगाएं तो भारत को अग्रणी राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकता। आजादी के महापर्व पर आएइ हम विकसित भारत बनाने का संकल्प लें और सपनों में रंग भरने के लिए जुट जाएं।

(लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं।)

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