
भारतीय फोटोग्राफी की दुनिया में यदि किसी एक नाम को संवेदनशील दृष्टि, मानवीय सरोकार और जीवंत चित्रों के लिए सर्वाधिक सम्मान प्राप्त है, तो वह हैं प्रख्यात फोटोग्राफर रघु राय। वे केवल एक फोटोग्राफर नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन के अद्वितीय दस्तावेज़कार थे। उनके कैमरे ने भारत की आत्मा को जिस गहराई और ईमानदारी से देखा, वह उन्हें विश्व के महानतम फोटोग्राफरों की श्रेणी में स्थापित करता है। उनकी तस्वीरों में केवल दृश्य नहीं होते, बल्कि भावनाएं, संघर्ष, उम्मीद, पीड़ा और जीवन की धड़कन भी दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी फोटोग्राफी केवल कला नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज़ बन जाती है। पिछले दिनों 26 अप्रैल, 2026 को हमने अपने समय के बेजोड़ विजुअल इतिहासकार को खो दिया जिसने देश के छह दशकों के दृश्य इतिहास को अपनी फोटोग्राफी कला से समृद्ध बनाया।
रघु राय का जन्म 8 दिसंबर, 1942 को वर्तमान पाकिस्तान के झंग नामक स्थान पर हुआ था। विभाजन के समय उनका परिवार भारत आ गया। बचपन में उन्होंने विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और सामाजिक परिवर्तन को बहुत करीब से देखा। इन अनुभवों ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। शायद यही कारण है कि आगे चलकर उनकी तस्वीरों में आम लोगों का दर्द, संघर्ष और संवेदनाएँ इतनी प्रभावशाली ढंग से दिखाई देती हैं। बचपन से ही वे अत्यंत संवेदनशील और जिज्ञासु स्वभाव के थे। हालांकि प्रारंभिक जीवन में उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि वे फोटोग्राफर बनेंगे।
रघु राय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में प्राप्त की। युवावस्था में उन्होंने कुछ समय तक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन उनका मन उसमें नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने सेना की जाट रेजिमेंट में कुछ समय तक कार्य किया। सेना का अनुशासन और जीवन के विविध अनुभवों ने उनकी सोच को व्यापक बनाया। इसी दौरान उनके बड़े भाई एस. पॉल, जो स्वयं एक प्रसिद्ध फोटोग्राफर थे, ने उन्हें फोटोग्राफी की ओर प्रेरित किया। भाई के कैमरे ने रघु राय के भीतर छिपे कलाकार को पहचानने का अवसर दिया।
सन् 1965 में उन्होंने गंभीरता से फोटोग्राफी शुरू की। प्रारंभ में वे दिल्ली की सड़कों, बाजारों और आम लोगों के जीवन को कैमरे में कैद करने लगे। उनकी तस्वीरों में एक अलग प्रकार की जीवंतता और संवेदनशीलता दिखाई देती थी। वे केवल दृश्य नहीं लेते थे, बल्कि उस क्षण की आत्मा को पकड़ने का प्रयास करते थे। उनकी प्रतिभा को जल्द ही पहचान मिल गई और वे प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘द स्टेट्समैन’ से जुड़ गए। यहाँ उन्होंने फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने कॅरियर की शुरुआत की।
द स्टेट्समैन में कार्य करते हुए रघु राय ने भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं को अपने कैमरे के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनकी तस्वीरें केवल समाचारों का हिस्सा नहीं होती थीं, बल्कि वे समाज की गहराई को सामने लाती थीं। गरीबी, भीड़, राजनीतिक घटनाएँ, धार्मिक आस्था, ग्रामीण जीवन और शहरी संघर्ष—इन सभी विषयों को उन्होंने बड़ी संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया। उनकी शैली में मानवीय दृष्टिकोण सबसे अधिक महत्वपूर्ण था।
रघु राय के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर ब्रैसों ने उनकी तस्वीरें देखीं और उनसे प्रभावित हुए। कार्टियर-ब्रेसों ने उन्हें विश्व की प्रतिष्ठित फोटो एजेंसी मैग्नम फोटोज से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। 1977 में रघु राय मैग्नम फोटोस के सदस्य बने। यह किसी भी भारतीय फोटोग्राफर के लिए अत्यंत गौरव की बात थी। मैग्नम से जुड़ने के बाद उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गई।
रघु राय की फोटोग्राफी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे भारत को उसकी वास्तविकता में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने भारत की चमक-दमक के साथ-साथ उसकी गरीबी, अव्यवस्था और संघर्ष को भी पूरी ईमानदारी से दिखाया। उनकी तस्वीरों में किसी प्रकार की कृत्रिमता नहीं होती। वे साधारण लोगों के असाधारण क्षणों को पकड़ने में माहिर थे। चाहे किसी साधु की ध्यानमग्न मुद्रा हो, किसी मजदूर का संघर्ष, किसी बच्चे की मुस्कान या किसी राजनीतिक नेता का भाव—रघु राय हर दृश्य को गहरी संवेदना के साथ प्रस्तुत करते हैं।
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ रघु राय का विशेष संबंध रहा। उन्होंने इंदिरा गांधी के जीवन के अनेक महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में कैद किया। उनके द्वारा खींची गई इंदिरा गांधी की तस्वीरें आज ऐतिहासिक महत्व रखती हैं। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में जो शोक और अस्थिरता का वातावरण था, उसे भी रघु राय ने अपने कैमरे में बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी तस्वीरें केवल घटनाओं का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि इतिहास की भावनात्मक अभिव्यक्ति बन गईं।
रघु राय की राजनीतिक फोटोग्राफी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने सत्ता के चमकदार पक्ष के साथ-साथ उसके मानवीय और संवेदनशील पक्ष को भी दिखाया। वे राजनीतिक घटनाओं को केवल समाचार के रूप में नहीं, बल्कि समाज पर उनके प्रभाव के संदर्भ में प्रस्तुत करते थे। उनकी तस्वीरों में राजनीतिक रैलियाँ, जनसभाएँ और नेताओं के निजी क्षण भी दिखाई देते हैं। रघु राय ने केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और आध्यात्मिकता को भी गहराई से चित्रित किया। उन्होंने बनारस, राजस्थान, कोलकाता, दिल्ली और भारत के अनेक हिस्सों के जीवन को अपने कैमरे में उतारा। उनकी तस्वीरों में भारतीय संस्कृति की विविधता, रंग और जीवन की ऊर्जा स्पष्ट दिखाई देती है। विशेष रूप से धार्मिक आयोजनों और मेलों की उनकी तस्वीरें अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती हैं।
सन् 1984 की भोपाल गैस त्रासदी को रघु राय ने जिस संवेदनशीलता से दुनिया के सामने रखा, वह उनकी फोटोग्राफी का सबसे मार्मिक अध्याय माना जाता है। भोपाल गैस त्रासदी के बाद उन्होंने जो तस्वीरें खींचीं, वे आज भी लोगों को झकझोर देती हैं। मृत बच्चों के चेहरे, पीड़ित परिवारों का दर्द और विनाश का भयावह दृश्य—इन सभी को उन्होंने इतनी ईमानदारी से प्रस्तुत किया कि पूरी दुनिया इस त्रासदी की गंभीरता को महसूस कर सकी। उनकी तस्वीरें केवल पत्रकारिता नहीं थीं, बल्कि मानवता के पक्ष में एक शक्तिशाली आवाज थीं।
रघु राय ने पर्यावरण, सामाजिक असमानता और मानव अधिकारों जैसे विषयों पर भी व्यापक कार्य किया। उनकी तस्वीरें कई बार समाज को आईना दिखाने का कार्य करती हैं। वे मानते हैं कि फोटोग्राफी केवल सुंदर दृश्य लेने की कला नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है। यही कारण है कि उनके कार्यों में मानवीय संवेदना सबसे अधिक दिखाई देती है।
रघु राय के कृतित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मानवीय दृष्टि है। वे कैमरे को केवल तकनीकी उपकरण नहीं मानते, बल्कि उसे समाज और मनुष्य की संवेदनाओं को समझने का माध्यम मानते हैं। उनकी तस्वीरों में व्यक्ति की भावनाएँ, सामाजिक परिस्थितियाँ और जीवन की वास्तविकता अत्यंत स्वाभाविक रूप में दिखाई देती हैं। वे ऐसे क्षणों को पकड़ने में सक्षम हैं जो सामान्य दृष्टि से अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। यही कारण है कि उनकी तस्वीरें केवल दृश्य नहीं, बल्कि कहानियाँ बन जाती हैं।
उनकी तस्वीरों की एक और विशेषता प्रकाश और छाया का अद्भुत प्रयोग है। वे प्राकृतिक रोशनी का उपयोग अत्यंत कलात्मक ढंग से करते हैं। उनकी रचनाओं में फ्रेमिंग, संरचना और भावनात्मक संतुलन का अनूठा मेल दिखाई देता है। वे किसी दृश्य को केवल तकनीकी दृष्टि से नहीं देखते, बल्कि उसमें छिपी कहानी को समझने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि उनकी तस्वीरें दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती हैं।
रघु राय ने अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और संस्थानों के लिए कार्य किया। उनकी तस्वीरें नेशनल जियोग्राफिक, टाइम तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में प्रकाशित हुईं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण फोटो पुस्तकों का निर्माण भी किया। उनकी पुस्तकों में भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का व्यापक चित्रण देखने को मिलता है। संगीत में उनकी गहरी रुचि थी और उन्होंने अनेक संगीतकारों जैसे पंडित रविशंकर, अकबर अली खान, एमएस सुब्बुलक्ष्मी, हरिप्रसाद चौरसिया, बिस्मिल्लाह खान आदि के मूड्स को अपने कैमरे में कैद किया। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘रघु रायस इंडिया’, ‘देहली’, ‘केलकटा’, ‘मदर टेरेसा’, ‘खजुराहो’ और ‘द सिक्ख’ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन पुस्तकों में उन्होंने भारत के विभिन्न पक्षों को अत्यंत कलात्मक और संवेदनशील दृष्टि से प्रस्तुत किया है। मदर टेरेसा पर आधारित उनकी तस्वीरें विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन तस्वीरों में मानव सेवा और करुणा का अद्भुत चित्रण दिखाई देता है।
रघु राय को उनके योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। सन् 1972 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें बहुत कम आयु में प्राप्त हुआ, जो उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त उन्हें अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान भी मिले।
रघु राय की फोटोग्राफी केवल पेशा नहीं, बल्कि जीवन का मिशन रही है। वे हमेशा कहते हैं कि एक अच्छा फोटोग्राफर बनने के लिए केवल कैमरा पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संवेदनशील हृदय और समाज को समझने की दृष्टि भी आवश्यक होती है। उन्होंने युवा फोटोग्राफरों को हमेशा यही संदेश दिया कि वे तकनीक से अधिक मानवीय दृष्टिकोण को महत्व दें। आज भी रघु राय भारतीय फोटोग्राफी की दुनिया में प्रेरणा स्रोत माने जाते हैं। नई पीढ़ी के फोटोग्राफर उनके कार्यों से सीख लेते हैं। उन्होंने भारतीय फोटो पत्रकारिता को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी तस्वीरें केवल कला का उदाहरण नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज़ हैं।
रघु राय की कला ने हमें यह बताया कि सच्ची कला वही है जो समाज की भावनाओं को अभिव्यक्त करे और लोगों के जीवन को छू सके। उन्होंने अपने कैमरे के माध्यम से भारत को जिस संवेदनशीलता और ईमानदारी से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, वह अद्वितीय है। उनकी फोटोग्राफी में भारत की आत्मा दिखाई देती है—उसकी पीड़ा, उसकी सुंदरता, उसकी विविधता और उसकी आशा। यही कारण है कि रघु राय केवल एक महान फोटोग्राफर नहीं, बल्कि भारत की दृश्य स्मृति के संरक्षक माने जाते हैं।
– विभागाध्यक्ष, सिनेमा अध्ययन विभाग,
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल

डॉ.पवित्र श्रीवास्तव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंपर्क और विज्ञापन विभाग के अध्यक्ष हैं। देश के वरिष्ठ मीडिया अध्यापकों में शामिल हैं। फ़िल्म में विशेष रुचि। अनेक विश्वविद्यालयों के मीडिया विभागों में अध्ययन मंडल के सदस्य हैं।